बुडियांळी जूती


 "बुडियांळी जूती"

चालता जद चरड़ चरड़ करती,

जाणै बां'रै हाडा स्यूं होड़ करै।

टाबरिया नैं बूंटिया दिरा'र खुद,

चापू लगवा लेता बोदी खाल रौ।

पण हिम्मत री कमी कोनी ही,

कवंता आपां'रै मौज है मौज।।

  • राधेश्याम जोशी कोहिणा 

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